Ruins of Bhilai College : भिलाई का खंडहर कॉलेज

भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र के खुर्सीपार स्थित शासकीय मोह़न लाल जैन महाविद्यालय की मौजूदा स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह वही कॉलेज है जिसे क्षेत्र का एकमात्र शासकीय महाविद्यालय माना जाता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आती है।

कॉलेज परिसर में टूटी-फूटी छतें, जगह-जगह दरारें, गिरते सीमेंट के टुकड़े और सीलन भरी दीवारें छात्रों की सुरक्षा पर सीधा खतरा बन चुकी हैं। रिपोर्टिंग के दौरान स्वयं मीडिया कर्मियों को भी आशंका रही कि कहीं छत का कोई हिस्सा गिर न जाए।

🚻 गर्ल्स वॉशरूम और पानी: सबसे बड़ी परेशानी

छात्राओं ने खुलकर बताया कि कॉलेज में गर्ल्स वॉशरूम की भारी कमी है। एक ही वॉशरूम का उपयोग छात्राओं और स्टाफ दोनों को करना पड़ता है, जिससे असहजता और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
इसके साथ ही पीने के पानी की व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है—एक ही वाटर कूलर, वह भी टंकी की सफाई पर सवालों के घेरे में।

🏫 नशा, असामाजिक तत्व और सुरक्षा का अभाव

कॉलेज परिसर और आसपास के इलाके में नशाखोरी व बाहरी लोगों की आवाजाही की शिकायतें सामने आई हैं। छात्रों का कहना है कि कोई स्थायी सुरक्षा गार्ड नहीं होने के कारण कोई भी व्यक्ति आसानी से अंदर आ जाता है, जिससे विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

🎓 छात्रों की आवाज़

ओम प्रकाश (बी.एससी. छात्र): “हम दूर-दराज़ से पढ़ने आते हैं, पानी की सुविधा नहीं है, बारिश में क्लास के अंदर पानी टपकता है। डर के माहौल में पढ़ाई होती है।”

अर्चना पटेल (एम.एससी., केमिस्ट्री): “सबसे बड़ी समस्या बिल्डिंग, पानी और गर्ल्स वॉशरूम की है। बारिश में करंट तक की स्थिति बन जाती है।”

शुभम सिंह (स्थानीय छात्र): “सुरक्षा गार्ड नहीं है, पानी की टंकी साफ नहीं, स्पोर्ट्स टीचर और लाइब्रेरियन तक नहीं हैं।”

🧩 प्रबंधन का पक्ष

कॉलेज की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री बी.एल. राजू ने स्वीकार किया कि स्थिति गंभीर है। उन्होंने बताया कि “एक पहल – खुर्सीपार कॉलेज के लिए” अभियान के तहत समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील की गई है। साथ ही बीएसपी और शासन स्तर पर पुनर्निर्माण के लिए अनुमति और फंड को लेकर प्रयास जारी हैं, हालांकि भूमि की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

❓ सवाल जो जवाब मांगते हैं

करोड़ों की स्वीकृत राशि होने के बावजूद बुनियादी सुविधाएँ क्यों नहीं?

छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी समस्याएँ कब तक अनदेखी रहेंगी?

क्या शिक्षा केवल भाषणों और आयोजनों तक सीमित रह गई है?

✍️ संपादकीय टिप्पणी

यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग पर आरोप लगाने का प्रयास नहीं है, बल्कि छात्रों द्वारा व्यक्त अनुभवों और मौके पर दिखी परिस्थितियों पर आधारित एक जनहित संपादकीय है। शिक्षा का अधिकार केवल दाख़िले तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित और गरिमामय वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।

👉 अपील:
उच्च शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे इस महाविद्यालय का स्थल निरीक्षण कर ठोस और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें, ताकि विद्यार्थी डर नहीं, बल्कि भरोसे के साथ शिक्षा ग्रहण कर सकें।

(यह संपादकीय जनहित में, उपलब्ध बयानों व दृश्य साक्ष्यों के आधार पर तैयार किया गया है।)

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